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भाभूस: एक झलक
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भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के समक्ष मौजूदा वैश्विक प्रवृत्ति 'धन सृजन' और 'पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण' के संरक्षण के बीच सद्भाव को प्रोत्‍साहन देना है। पृथ्वी के संसाधनों का दायरा पृथ्वी से समाप्त होने वाले खनिजों की उपयोगितावादी निकासी के परे तक फैला हुआ है, और विकास के हर पहलू से टकरा रहा है। गतिशील घटनाओं की समझ और सतह पर भूगर्भिक बलों में तेजी सतत विकास में केंद्रीय चिंता का क्षेत्र बनता जा रहा है। शहरी नियोजन, विरासत संरक्षण, बहुआयामी निर्माण गतिविधि, भूस्खलन और कटाव, बाढ़ और गादीकरण, भूकंप, अपशिष्ट निपटान और पानी की आपूर्ति ऐसी सभी गतिविधियाँ हैं, (नियमित भूवैज्ञानिक अनुसंधानों के अलावा) जिनके योजना स्तर में ही भूवैज्ञानिक कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिसमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण पिछले कुछ वर्षों में काफी हद तक योगदान दे रहा है...
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