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परिचय
 
 
 
 
अंतर्राष्ट्रीय भूविज्ञान कार्यक्रम (आईजीसीपी)- पूर्व में अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक सहसंबंध कार्यक्रम - यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) और आईयूजीएस (भू विज्ञान का अंतर्राष्ट्रीय संघ) का बहुत ही सोच विचार युक्त एक संयुक्त प्रयास है और वर्ष 1972 में यह मुख्‍यालय सहित फ्रांस, पेरिस में स्थापित किया गया था।

आईजीसीपी एक अंतर्राष्ट्रीय और बहु-आयामी कार्यक्रम है। यह पृथ्वी विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किए हुए है और अन्य यूनेस्को और आईयूजीएस वैज्ञानिक कार्यक्रमों का पूरक है। यह जल विज्ञान, पारिस्थितिकी, समुद्र विज्ञान, वायुमंडल और जैविक विज्ञान जैसे विषयों पर पारस्परिक विचार-विमर्श का समर्थन करता है। आईजीसीपी विकासशील देशों में भूवैज्ञानिक ज्ञान और विशेषज्ञता बढ़ाकर सतत विकास को बढ़ावा देने का एक बहुत ही सफल और लागत प्रभावी तरीका साबित हुआ है।
आईजीसीपी का प्राथमिक उद्देश्‍य, अधिक औद्योगिक और विकासशील देशों से उन लोगों से विशेष रूप से उन व्‍यक्तियों के बीच, भूवैज्ञानिक समस्‍याओं पर अनुसंधान के क्षेत्र में दुनिया भर से वैज्ञानिकों के बीच अंतर्राष्‍ट्रीय सहायोग की सुविधा उपलब्‍ध कराना है। लंबी अवधि के संयुक्त अनुसंधान प्रयासों, बैठकों, फील्ड यात्राओं तथा कार्यशालाओं के माध्यम से आईजीसीपी का उद्देश्य भूविज्ञान के उपयोग को बढ़ावा देना है, जिसमें सतत विकास, स्वास्थ्य और मानवता की सुरक्षा तथा प्राकृतिक आपदाओं और संसाधन दोहन से पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने जैसे वैश्विक मुद्दे शामिल हैं, परंतु इसका उद्देश्य यहीं तक सीमित नहीं है।

 
 
  • मानवीय जीवन निर्वाह की दशा को सुधारने के लिए वैश्विक पर्यावरण को प्रभावित करने वाले भूवैज्ञानिक कारकों की समझ में सुधार।
  • खनिज, ऊर्जा और भूजल के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने के लिए और भी अधिक प्रभावी एवं स्थायी तरीकों का विकास करना।
  • सामाजिक रूप से प्रासंगिक मुद्दों पर जोर देते हुए वैश्विक महत्व की भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं और अवधारणाओं की समझ में वृद्धि करना।
  • • भूवैज्ञानिक अनुसंधान करने के मानकों, तरीकों और तकनीकियों में सुधार, जिसमें औद्योगिकृत और विकासशील देशों के वैज्ञानिकों के बीच भूवैज्ञानिक और भूतकनीकी ज्ञान का हस्तांतरण शामिल है।
 
 
  1. गूढ़ धरातल: यह हमारे पर्यावरण को कैसे नियंत्रित करता है।
  2. वैश्विक परिवर्तन और जीवन का विकास: भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड से साक्ष्य।
  3. भू-संकट: जोखिमों को कम करना।
  4. जल चक्र का भू-विज्ञान।
  5. पृथ्वी के संसाधन: हमारे समाज को कायम रखना।
 
 


आईजीसीपी के उद्देश्यों को अलग-अलग परियोजनाओं के माध्यम से पूरा किया जाता है। किसी भी दिए गए वर्ष में सक्रिय परियोजनाओं की संख्या, यूनेस्को और आईयूजीएस की वर्तमान प्राथमिकताओं, धन की उपलब्धता, मौजूदा परियोजनाओं की सफलता एवं प्रगति तथा प्रस्तुत किए गए नए प्रस्तावों की गुणवत्ता और श्रेष्‍ठता की पर निर्भर करता है।

आईजीसीपी परियोजनाओं को पांच वर्ष से अधिक अवधि के लिए मंजूरी नहीं दी जाती है। फिर भी, आवश्यकता पड़ने पर आईजीसीपी वैज्ञानिक बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर आईयूजीएस/ यूनेस्को कुछ परियोजनाओं के लिए एक वर्ष का विस्तार देता है।

नई आईजीसीपी परियोजनाओं के प्रस्तावों का आंकलन और चालू परियोजनाओं की वार्षिक रिपोर्ट आईजीसीपी वैज्ञानिक बोर्ड द्वारा प्रतिवर्ष आमतौर पर फरवरी के पूर्वार्ध के दौरान आयोजित की जाती है और यह रिपोर्ट उनकी वेबसाइट में प्रकाशित होती है।

किसी भी नई परियोजना प्रस्तावों को स्वीकृति हेतु आईजीसीपी वैज्ञानिक बोर्ड के समक्ष हर वर्ष अक्‍तुबर मास तक प्रस्तुत किया जाना होता है। अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी के लिए प्रेरक वैश्विक प्रकृति के प्रस्तावों को आम तौर पर प्रोत्साहित किया जाता है। परियोजना के वैश्विक नेता परियोजना अवधि के अंत तक अंतिम रिपोर्ट प्रस्‍तुत करता है।

प्रत्येक परियोजना के समर्थन हेतु वार्षिक आवंटन उसकी गुणवत्ता पर, और पहले से ही वित्त पोषित परियोजना के लिए पिछले वर्ष के दौरान उसके प्रदर्शन पर निर्भर करता है। आईजीसीपी परियोजनाओं के लिए यूनेस्को और आईयूजीएस द्वारा प्रतिवर्ष प्रदत्त वित्तीय सहायता में अनुसंधान के आयोजन और प्रबंधन (अनुसंधान के लिए ही नहीं), परियोजना से संबंधित बैठकों तथा कार्यशालाओं और साथ ही विकासशील देशों के वैज्ञानिकों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने हेतु लागत का कुछ हिस्सा शामिल होता है।

 
 
 
 
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