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भारत विविध भौतिक विशेषताओं, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और घटनापूर्ण प्राचीन इतिहास का एक देश हैहै। बाकी दुनिया के समक्ष इस महान देश के प्रदर्शन में पर्यटन एक प्रमुख भूमिका निभाता है। अभी तक, देश के कोने-कोने में पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण पहल की गई है।

भारतीय उपमहाद्वीप युगों-युगों के विभिन्न भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं की स्पष्ट झलक प्रदर्शित करता है और यह रोचक भूवैज्ञानिक विशेषताओं का भण्डार है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इनमें से कुछ स्थलों को पहले से ही राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक के रूप में सूचीबद्ध किया है। यह आवश्यक है कि भारत का पर्यटन मानचित्र इन भूवैज्ञानिक स्मारकों और उनके जैसे अन्य स्मारकों से समृद्ध हो, ताकि देश और विदेश के आगंतुक इस देश के वास्तविक अतीत जैसे उपमहाद्वीप का गठन, पर्वतन, पुरा-पर्यावरण और पुरा वनस्पति एवं जीवों के अनोखे संग्रह का दर्शन कर सकें।

भारत का भूवैज्ञानिक मानचित्र
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने ऐसी सुविधाओं के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी ली है तथा इसने देश के विभिन्न भागों में स्थित 26 ऐसे स्थलों को राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक के रूप में घोषित किया है।

इन प्राकृतिक चमत्कारों का बहुमूल्य राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षण करने और इनमें बड़े पैमाने पर रूचि पैदा करने के लिए वर्ष 2001 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के 150 वर्ष की सालगिरह के मौके पर "राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक” पर एक विशेष प्रकाशन जारी किया गया था।

 
भारत के राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारकों पर यात्रा विवरणिका:दक्षिण क्षेत्र
श्री आर. एच. ख्वाजा, भारत सरकार के सचिव, खान मंत्रालय ने प्रथम जनवरी, 2013 को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कार्यालय, दक्षिणी क्षेत्र, हैदराबाद की अपनी यात्रा के दौरान भू-पर्यटन पर यात्रा विवरणिका "भारत के राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक: दक्षिण क्षेत्र" जारी किया।
विवरणिका: भारत के राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक: दक्षिण क्षेत्र
 
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